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राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक के बाद एशियाई खेलों के लिए दीपा की अपेक्षाएं बढ़ी PDF Print E-mail
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Monday, 15 September 2014 16:09


नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों की महिला जिम्नास्टिक स्पर्धा में भारत को पहला पदक दिलाने वाली दीपा करमाकर ने एशियाई खेलों से पहले कहा कि बढ़ती अपेक्षाओं ने उन्हें इंचियोन में 19 सितंबर से शुरू हो रही प्रतियोगिता से पहले थोड़ा दबाव में ला दिया है।


     यह 21 वर्षीय खिलाड़ी राष्ट्रमंडल खेलों की महिला वाल्ट स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने के बाद अपने गृह राज्य त्रिपुरा में छा गई थी।

     दीपा ने प्रेट्र को दिए साक्षात्कार में कहा, ‘‘हां, इस बार थोड़ा दबाव है। राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक जीतने के बाद अब लोग मुझसे अपेक्षाएं करने लगे हैं। लेकिन बेशक मुझे लगता है कि यह सकारात्मक बदलाव है। मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए अभ्यास कर रही हूं। उम्मीद करती हूं कि मैं अपने प्रशंसकों को निराश नहीं करूंगी।’’

     राष्ट्रमंडल खेलों के अगर प्रतिस्पर्धा कड़ी थी जो चीन, कोरिया और जापान के खिलाड़ियों की मौजूदगी में एशियाई खेलों में


यह और कड़ी होगी। दीपा का नजरिया हालांकि इस मामले में अलग है।

          दीपा ने कहा, ‘‘यहां तक कि राष्ट्रमंडल खेलों में मुकाबला आसान नहीं था। मैं एशियाई खेलों में प्रतिस्पर्धा को राष्ट्रमंडल खेलों के बराबर आंकती हूं। ग्लास्गो में अगर इंग्लैंड, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया से कड़ी टक्कर मिली तो इंचियोन में चीन, कोरिया और जापान कड़े प्रतिस्पर्धी होंगे। इसलिए यह तीन-तीन से बराबर है।’’

     इलाहाबाद के जिम्नास्ट आशीष ने 2010 में ग्वांग्झू एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था लेकिन ग्लास्गो में वह दूसरे वाल्ट प्रयास में गलत लैंडिंग के कारण अंतिम स्थान पर रहे थे।

     दीपा ने हालांकि कहा कि आशीष की उपलब्धि उनके लिए प्रेरणादायक है।

(भाषा)


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