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गुरुत्व बल के बाद PDF Print E-mail
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Saturday, 04 May 2013 11:50

आशीष श्रीवास्तव
जनसत्ता 4 मई, 2013: अल्बर्ट आइंस्टाइन ने 1905 में ‘विशेष सापेक्षतावाद’ और 1915 में ‘सामान्य सापेक्षतावाद’ के सिद्धांत को प्रस्तुत कर भौतिकी की नींव हिला दी थी। सामान्य सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्यूटन के गति के तीन नियम पूरी तरह से सही नहीं हैं। जब किसी पिंड की गति प्रकाश गति के समीप पहुंचती है तो वे कार्य नहीं करते हैं। साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार न्यूटन का गुरुत्व का सिद्धांत भी अत्यधिक गुरुत्वाकर्षण वाले क्षेत्रों में कार्य नहीं करता है। ये दोनों सिद्धांत कमजोर गुरुत्वाकर्षण के लिए समान गणना करते हैं। लेकिन निम्न तीन उदाहरणों में इन दोनों सिद्धांतों की गणना में अंतर स्पष्ट हो जाता है।
बुध ग्रह की कक्षा समय के साथ अपने प्रतल से विचलित होती है। इसे सामान्य रूप से ग्रह की सूर्य समीप स्थिति में विचलन कहा जाता है। न्यूटन के सिद्धांत के अनुसार इस विचलन को पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता है। लेकिन साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के मुताबिक हर शताब्दी में तैंतालीस सेकेंड का विचलन अतिरिक्त होना चाहिए। यह प्रभाव काफी छोटा है, लेकिन गणना के अनुसार और सटीक है। आइंस्टाइन के सिद्धांत के अनुसार गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में प्रकाश की दिशा में परिवर्तन होना चाहिए, जो न्यूटन के सिद्धांत के विपरीत है। लेकिन सूर्यग्रहण के समय इसे निरीक्षित किया गया और आइंस्टाइन के सिद्धांत के प्रभाव और सटीक मूल्य को सही पाया गया। इस प्रभाव को गुरुत्वीय लेंसिंग कहा जाता है। साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुसार किसी विशाल गुरुत्वीय क्षेत्र से आने वाले प्रकाश में लाल विचलन (रेड शिफ्ट) होना चाहिए। यह भी न्यूटन के सिद्धांत के विपरीत है। विस्तृत निरीक्षण विशाल गुरुत्वीय क्षेत्र से आने वाले प्रकाश में लाल विचलन पाया गया और उसका मूल्य आइंस्टाइन के सिद्धांत की गणना से मेल खाता था।
विद्युत चुंबकीय क्षेत्र की तरंगें हो सकती हैं जो ऊर्जा का वहन करती हैं, इसी को प्रकाश कहा जाता है। उसी तरह, गुरुत्वीय क्षेत्र की भी ऊर्जा तरंगें होनी चाहिए, जिन्हें गुरुत्वीय तरंग कहते हैं। इन तरंगों को काल-अंतराल में वक्रता उत्पन्न करने वाली लहरों के रूप में


देखा जा सकता है। इनकी गति भी प्रकाश के तुल्य होनी चाहिए। जिस तरह त्वरण करते आवेश से विद्युत-चुंबकीय तरंगें उत्पन्न हुर्इं, त्वरण करते द्रव्यमान से भी गुरुत्वीय तरंगें उत्पन्न होनी चाहिए। लेकिन गुरुत्वीय तरंग को महसूस या उनका निरीक्षण करना कठिन है, क्योंकि वे बहुत कमजोर होती हैं। अभी तक उनके निरीक्षण का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिल पाया है, लेकिन उन्हें अप्रत्यक्ष रूप से ‘युग्म पल्सर’ तारों में देखा गया है। पल्सर तारों से उत्पन्न पल्सों के आगमन समय को सटीकता से मापा जा सकता है। यहां पाया गया कि कक्षा में कमी की दर एक वर्ष में एक सेकेंड का दस लाखवां भाग है। यह कमी गुरुत्वीय तरंगों के रूप में ऊर्जा क्षय के फलस्वरूप है, जो साधारण सापेक्षतावाद के सिद्धांत के अनुरूप है।
आइंस्टाइन का विशेष सापेक्षतावाद सिद्धांत उन्हीं तंत्रों के लिए है जो त्वरण नहीं कर रहे हों, यानी उनकी गति में कोई परिवर्तन नहीं हो रहा हो। न्यूटन के दूसरे नियम के अनुसार त्वरण के लिए बाह्य बल आवश्यक है। विशेष सापेक्षतावाद बलों की अनुपस्थिति में ही वैध है। इसी वजह से इसे गुरुत्वीय बल की उपस्थिति वाले क्षेत्रों में प्रयोग में नहीं लाया जा सकता है। विशेष सापेक्षतावाद की सबसे बड़ी खोज द्रव्यमान और ऊर्जा में संबंध है। दूसरी सबसे बड़ी खोज काल और अंतराल पर गति का प्रभाव है। प्रकाश गति के समीप गति प्राप्त करने पर अंतराल गति की दिशा में सिकुड़ जाता है और समय की गति धीमी हो जाती है। अनेक प्रयोगों ने सिद्ध किया है कि विशेष सापेक्षतावाद का सिद्धांत सही है और हमारी समझ से न्यूटन के नियम प्रकाश गति के समीप गलत हो जाते हैं। विशेष सापेक्षतावाद के सिद्धांत की एक सीमा है कि इसके वैध होने के लिए त्वरण, यानी बलों की अनुपस्थिति अनिवार्य है। विशेष सापेक्षतावाद सिद्धांत की इस कमी को दूर करने के लिए आइंस्टाइन ने साधारण सापेक्षतावाद का सिद्धांत प्रस्तुत किया। न्यूटन के गुरुत्व बल के सिद्धांत की जगह लेने एक नया सिद्धांत आ गया।

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